न्यूजीलैंड क्रिकेट के भरोसेमंद ऑलराउंडर डग ब्रेसवेल ने 35 साल की उम्र में क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट से संन्यास की घोषणा कर दी है। ब्रेसवेल का नाम आते ही कीवी फैंस के जहन में सबसे पहले साल 2011 का होबार्ट टेस्ट ताजा हो जाता है, जब उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ऐतिहासिक प्रदर्शन कर न्यूजीलैंड को 26 साल बाद कंगारुओं पर टेस्ट जीत दिलाई थी।
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ न्यूजीलैंड की आखिरी टेस्ट जीत 2011 में होबार्ट के मैदान पर ही आई थी। उस मुकाबले में डग ब्रेसवेल ने गेंद और बल्ले दोनों से कमाल दिखाया था। दूसरी पारी में उन्होंने 40 रन देकर 6 विकेट झटके थे, जबकि पहली पारी में भी अहम विकेट लिए थे। उनके इस प्रदर्शन ने उन्हें रातों-रात कीवी क्रिकेट का हीरो बना दिया।
डग ब्रेसवेल ने न्यूजीलैंड के लिए टेस्ट, वनडे और टी20—तीनों फॉर्मेट खेले। वह एक ऐसे ऑलराउंडर के रूप में पहचाने गए, जो मुश्किल समय में टीम के लिए योगदान दे सकता था। सीम मूवमेंट का फायदा उठाने में माहिर ब्रेसवेल निचले क्रम में उपयोगी बल्लेबाजी भी करते थे।
हालांकि उनका करियर चोटों और निरंतरता की कमी से भी प्रभावित रहा, लेकिन जब-जब उन्हें मौका मिला, उन्होंने टीम के लिए प्रभाव छोड़ा। घरेलू क्रिकेट में भी ब्रेसवेल का योगदान अहम रहा और उन्होंने कई युवा खिलाड़ियों के लिए मिसाल कायम की।
संन्यास की घोषणा करते हुए ब्रेसवेल ने कहा कि क्रिकेट ने उन्हें बहुत कुछ दिया है और अब वह जीवन के अगले अध्याय की ओर बढ़ना चाहते हैं। उनके संन्यास के साथ न्यूजीलैंड क्रिकेट का एक यादगार अध्याय समाप्त हो गया है, जिसे खास तौर पर होबार्ट की ऐतिहासिक जीत के लिए हमेशा याद किया जाएगा।