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मस्जिद न जाने और मुस्लिम मतदाताओं से वोट न मांगने की बात कहने पर विपक्ष का हमला, राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया

अमेठी में भाजपा विधायक सुरेश पासी का बयान बना सियासी विवाद, मुस्लिम वोटरों को लेकर टिप्पणी पर घमासान

अमेठी  के जगदीशपुर से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक सुरेश पासी का एक बयान इन दिनों राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस बयान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें विधायक मुस्लिम समुदाय और उनके वोटों को लेकर खुलकर अपनी बात रखते नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल मच गई है और विपक्षी दलों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं आने की संभावना जताई जा रही है।

वायरल वीडियो में भाजपा विधायक सुरेश पासी यह कहते हुए दिखाई दे रहे हैं कि उन्हें मुस्लिम वोटरों की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह कभी मस्जिद नहीं जाते हैं और न ही भविष्य में कभी जाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह मुस्लिम समुदाय के घरों में जाकर वोट मांगने नहीं जाते। उनका यह बयान सामने आते ही सोशल मीडिया पर बहस का दौर शुरू हो गया।

विधायक सुरेश पासी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश और प्रदेश में चुनावी माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान समाज के विभिन्न वर्गों के बीच विभाजन की भावना को और गहरा कर सकते हैं। हालांकि, भाजपा की ओर से इस बयान पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

वीडियो वायरल होने के बाद विपक्षी दलों ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया है। विपक्ष का कहना है कि एक जनप्रतिनिधि को सभी समुदायों के लोगों का प्रतिनिधित्व करना चाहिए, न कि किसी एक वर्ग को नज़रअंदाज़ करना। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि इस तरह के बयान सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाते हैं और संविधान की भावना के विपरीत हैं।

दूसरी ओर, भाजपा समर्थकों का एक वर्ग विधायक के बयान को उनकी “व्यक्तिगत राय” बता रहा है। उनका कहना है कि सुरेश पासी ने जो कहा, वह उनकी निजी आस्था और राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि जब कोई व्यक्ति संवैधानिक पद पर होता है, तो उसकी हर बात सार्वजनिक और राजनीतिक महत्व रखती है।

यह पहली बार नहीं है जब किसी नेता का इस तरह का बयान विवादों में घिरा हो। इससे पहले भी कई बार नेताओं के धार्मिक या सामुदायिक टिप्पणियों को लेकर राजनीतिक विवाद सामने आते रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे बयान चुनावी माहौल में वोटों के ध्रुवीकरण को प्रभावित कर सकते हैं।

फिलहाल, इस पूरे मामले पर सबकी निगाहें भाजपा के शीर्ष नेतृत्व पर टिकी हुई हैं कि वह विधायक के इस बयान पर क्या रुख अपनाता है। वहीं, वायरल वीडियो के चलते यह मुद्दा आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है।

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