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कालेज परिसर के कमरे में चल रही थी संगठित नकली खाद–कीटनाशक फैक्ट्री, एक कर्मी गिरफ्तार, कई बड़े नाम रडार पर

अमेठी में नकली DAP और कीटनाशक फैक्ट्री का भंडाफोड़, करोड़ों के अवैध कारोबार का खुलासा

अमेठी जिले में किसानों की सेहत और उनकी फसलों से खिलवाड़ करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। जिला कृषि विभाग और राजस्व टीम की संयुक्त कार्रवाई में नकली DAP खाद और कीटनाशक बनाने वाली एक अवैध फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया गया है। यह फैक्ट्री कोतवाली क्षेत्र के ककवा रोड स्थित मंगलपुर गांव में बने आलोक प्रमोद इंटरमीडिएट कॉलेज के कैंपस के भीतर, एक कमरे में संचालित की जा रही थी।

कार्रवाई के दौरान टीम ने जब कमरे का ताला खुलवाया तो अंदर का नज़ारा देख अधिकारी भी हैरान रह गए। कमरे के भीतर नकली कीटनाशक और DAP तैयार करने के लिए पूरी तरह से व्यवस्थित सेटअप मौजूद था। मौके से रीजेंट अल्ट्रा कीटनाशक के 443 खाली रैपर, 38 खुले पैकेट और 414 पूरी तरह पैक किए गए पैकेट बरामद किए गए। बाजार में एक पैकेट की कीमत करीब 350 रुपये बताई जा रही है, जिससे यह अंदेशा और गहरा गया है कि यह कारोबार करोड़ों रुपये के स्तर पर चल रहा था।

इसके अलावा छापेमारी के दौरान IFCO DAP की 50 किलो वजन की दो बोरियां, नौ बोरियों में भरी नकली DAP और IFCO ब्रांड की 340 नई खाली बोरियां भी बरामद की गई हैं। इन बोरियों का इस्तेमाल नकली खाद को असली बताकर किसानों तक पहुंचाने के लिए किया जा रहा था।

छापे के समय मौके से राम उजागिर यादव नामक एक कर्मी को गिरफ्तार किया गया है। कमरे में तौल मशीन, पैकिंग मशीन और सिलाई मशीन भी मिली, जिससे यह साफ हो गया कि यह कोई छोटा-मोटा काम नहीं बल्कि पूरी तरह संगठित फैक्ट्री थी। टीम ने मौके से खाद और कीटनाशक के सैंपल लेकर जांच के लिए भेज दिए हैं और पूरे कमरे को सील कर दिया गया है।

जिला कृषि अधिकारी डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि इस कार्रवाई की शुरुआत नोएडा स्थित True Buddy Consulting Pvt. Ltd. की शिकायत के बाद हुई। कंपनी ने आरोप लगाया था कि उनके ब्रांड के नाम पर नकली कीटनाशक बाजार में बेचे जा रहे हैं। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कृषि विभाग ने ग्राहक बनकर जांच की और पुख्ता सबूत मिलने के बाद नायब तहसीलदार अमेठी के नेतृत्व में छापा मारा गया।

गिरफ्तार कर्मी राम उजागिर यादव ने पूछताछ में सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताया कि उसे शिवम तिवारी नाम के व्यक्ति ने काम पर रखा था। उसने दावा किया कि वह उसी दिन काम पर आया था और उसे 400 रुपये दिहाड़ी मिलनी थी। वह सिर्फ दो बोरी ही भर पाया था कि टीम ने उसे पकड़ लिया। हालांकि प्रशासन इस बयान की गहनता से जांच कर रहा है।

फिलहाल कृषि विभाग और पुलिस की टीमें इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हुई हैं। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस अवैध धंधे का असली मास्टरमाइंड कौन है, यह नेटवर्क किन-किन जिलों तक फैला हुआ है और कितने समय से किसानों को नकली खाद और कीटनाशक देकर ठगा जा रहा था।

विशेषज्ञों का कहना है कि नकली खाद और कीटनाशक न केवल फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि किसानों की मेहनत, पैसा और भविष्य तीनों को बर्बाद कर देते हैं। ऐसे में यह कार्रवाई सिर्फ एक फैक्ट्री पर छापा नहीं, बल्कि पूरे नकली खाद–कीटनाशक माफिया के लिए एक कड़ी चेतावनी मानी जा रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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