सोमनाथ (गुजरात)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अवसर पर ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना करने के बाद देश को संबोधित करते हुए कहा कि सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का विरोध करने वाली ताकतें आज भी किसी न किसी रूप में सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति, स्वाभिमान और सनातन चेतना का प्रतीक है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इतिहास में बार-बार सोमनाथ मंदिर को नष्ट करने की कोशिशें की गईं। आक्रांताओं ने मंदिर पर हमले कर न सिर्फ उसे तोड़ने का प्रयास किया, बल्कि भारत की आस्था, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक पहचान को मिटाने की भी साजिश रची। लेकिन वे अपने मंसूबों में कभी सफल नहीं हो पाए।
उन्होंने कहा,
“सोमनाथ मंदिर एक बार नहीं, बल्कि बार-बार तोड़ा गया। यदि यह सिर्फ संपत्ति लूटने के लिए होता, तो पहला हमला ही पर्याप्त था। लेकिन बार-बार हमले इस बात का प्रमाण हैं कि यह भारत की आस्था को तोड़ने का प्रयास था।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण रूप से आज़ादी के बाद भी जब सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की बात आई, तब कुछ ताकतों ने इसका विरोध किया। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि यह विरोध मानसिक गुलामी का प्रतीक था, जो भारत की सांस्कृतिक पुनरुत्थान की यात्रा को रोकना चाहता था।
पीएम मोदी ने कहा,
“सोमनाथ का इतिहास विनाश और पराजय का नहीं, बल्कि विजय और पुनर्निर्माण का इतिहास है। यह समय चक्र का प्रमाण है कि सत्य और आस्था अंततः विजयी होते हैं।”
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सोमनाथ की कहानी भारत की आत्मा की कहानी है। विदेशी आक्रांताओं ने इस पवित्र धरोहर को बार-बार कुचलने का प्रयास किया, लेकिन हर युग में सोमनाथ और अधिक भव्य रूप में खड़ा हुआ।
उन्होंने कहा कि महमूद गजनवी जैसे आक्रांताओं ने मंदिर को तोड़ा, लेकिन वे यह नहीं समझ पाए कि सोमनाथ केवल पत्थरों से बना ढांचा नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की चेतना में बसता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से आह्वान किया कि इतिहास से सबक लेते हुए भारत को सतर्क, सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना होगा। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत को कमजोर करने की कोशिशें आज भी अलग-अलग रूपों में हो रही हैं, इसलिए राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत रखना बेहद जरूरी है।
इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने मंदिर के समीप करीब 30 मिनट तक पूजा-अर्चना की और गर्भगृह की परिक्रमा की। इस दौरान उन्होंने हाथों में ध्वज लेकर श्रद्धा भाव से दर्शन किए।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अवसर पर प्रधानमंत्री का यह संदेश स्पष्ट था कि भारत अब अपने इतिहास पर गर्व करता है और अपनी सांस्कृतिक जड़ों को मजबूती से थामे हुए आगे बढ़ रहा है। सोमनाथ का पुनर्निर्माण केवल एक मंदिर का निर्माण नहीं, बल्कि भारत की सभ्यतागत चेतना की पुनर्स्थापना है।