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RJD प्रत्याशी और भोजपुरी अभिनेता खेसारी लाल यादव ने मीडिया से बातचीत में राजनीति को लेकर जताई निराशा, खुद को राजनीति से दूर रखने के दिए संकेत

बिहार विधानसभा चुनाव में हार के बाद खेसारी लाल यादव का बड़ा बयान, बोले– “राजनीति में सच बोलने की कोई जगह नहीं”

बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रत्याशी के रूप में उतरे भोजपुरी सिनेमा के मशहूर अभिनेता और गायक खेसारी लाल यादव को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है। चुनावी नतीजों के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए खेसारी लाल यादव ने राजनीति को लेकर एक बड़ा और बेबाक बयान दिया है, जो अब चर्चा का विषय बन गया है।

खेसारी लाल यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें लगता है कि राजनीति उनके जैसे कलाकारों के लिए सही जगह नहीं है। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि मैं एक कलाकार ही सही हूं। हम लोगों के लिए राजनीति सही नहीं है। राजनीति में सच बोलने से समस्या है।” उनके इस बयान से यह साफ झलकता है कि चुनावी अनुभव उनके लिए निराशाजनक रहा।

उन्होंने आगे कहा कि राजनीति में आगे बढ़ने के लिए सच बोलना नहीं, बल्कि झूठे वादे करना ज्यादा जरूरी हो गया है। खेसारी लाल यादव के मुताबिक, “मुझे लगता है कि यहां जो सच बोलेगा वह राजनीति में बहुत आगे तक नहीं जाएगा। यहां सिर्फ झूठे वादे करना है। अगर आपको यह करने आता है, तभी आप राजनीति में आइए। दुनिया को बेवकूफ बनाना है, तब आओ।”

उनका यह बयान न सिर्फ राजनीतिक व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि चुनावी राजनीति में नए लोगों, खासकर कला और फिल्मी दुनिया से आए चेहरों को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

खेसारी लाल यादव इससे पहले भी अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में रहे हैं। भोजपुरी सिनेमा में उनकी जबरदस्त फैन फॉलोइंग है और बिहार-पूर्वांचल के इलाकों में उनकी लोकप्रियता किसी से छिपी नहीं है। यही वजह थी कि उनके राजनीति में आने को लेकर काफी चर्चाएं थीं और समर्थकों को उम्मीद थी कि वे चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करेंगे। हालांकि, चुनावी नतीजों ने इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि खेसारी लाल यादव का यह बयान एक हारे हुए प्रत्याशी की निराशा भी हो सकता है, लेकिन इसके साथ-साथ यह राजनीति की उस सच्चाई को भी उजागर करता है, जिससे आम लोग भी अक्सर असहज महसूस करते हैं। राजनीति में आदर्शवाद और ईमानदारी की बात तो होती है, लेकिन व्यवहारिक स्तर पर हालात अलग नजर आते हैं।

खेसारी लाल यादव के इस बयान के बाद यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या वे भविष्य में राजनीति से पूरी तरह दूरी बना लेंगे या फिर किसी और रूप में अपनी राजनीतिक भूमिका तलाशेंगे। फिलहाल, उनके शब्दों से यही संकेत मिलता है कि वे खुद को एक कलाकार के रूप में ज्यादा सहज और संतुष्ट महसूस करते हैं।

उनके प्रशंसकों का मानना है कि खेसारी लाल यादव को राजनीति से ज्यादा अपनी कला और फिल्मों पर ध्यान देना चाहिए, जहां वे पहले से ही एक स्थापित नाम हैं। वहीं, कुछ लोग उनके बयान को सिस्टम पर करारा प्रहार मान रहे हैं, जो राजनीति में पारदर्शिता और सच्चाई की कमी की ओर इशारा करता है।

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