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आई-पैक कार्यालय और प्रशांत किशोर के आवास पर रेड को लेकर मुख्यमंत्री का जोरदार विरोध, भाजपा ने कहा– ममता को आरोपी बनाया जाए

ईडी की छापेमारी के खिलाफ सड़क पर उतरीं ममता, लगाए केंद्र पर राजनीतिक प्रतिशोध के आरोप

कोलकाता। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से ‘इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी’ (आई-पैक) के कार्यालय और उसके प्रमुख प्रशांत किशोर के आवास पर की गई छापेमारी के विरोध में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शुक्रवार को सड़क पर उतर आईं। मुख्यमंत्री ने कोलकाता में रैली निकालकर केंद्र सरकार और भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि ईडी की कार्रवाई राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है और इसका उद्देश्य आगामी चुनावों से पहले विपक्ष को डराना और दबाव में लेना है।

ममता बनर्जी ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वे सभी दस्तावेज सार्वजनिक करेंगी और किसी भी जांच से डरने वाली नहीं हैं। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित भाजपा के वरिष्ठ नेताओं पर हमला बोलते हुए कहा कि कोयला घोटाले समेत अन्य मामलों में भाजपा नेताओं को लाभ पहुंचाने के लिए जांच एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है। ममता ने यह भी आरोप लगाया कि ईडी की छापेमारी का मकसद 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस की आंतरिक रणनीति को कमजोर करना है।

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि आई-पैक का कार्यालय कोई सरकारी संस्था नहीं है और वहां छापा मारकर एजेंसियां लोकतंत्र पर हमला कर रही हैं। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस को डराया नहीं जा सकता और बंगाल की जनता भाजपा की इन चालों को समझती है। ममता बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि जिन राज्यों में भाजपा सत्ता में है, वहां जांच एजेंसियां निष्क्रिय रहती हैं, जबकि गैर-भाजपा शासित राज्यों में लगातार दबाव बनाया जाता है।

वहीं दूसरी ओर भाजपा ने इस पूरे मामले में ममता बनर्जी पर पलटवार किया है। भाजपा नेताओं ने मुख्यमंत्री के आचरण पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन घटनाओं से संकेत मिलते हैं, उनके आधार पर ममता बनर्जी और उनके करीबी लोगों को आरोपी बनाया जाना चाहिए। भाजपा का कहना है कि कोयला तस्करी और कथित धनशोधन मामलों में तृणमूल कांग्रेस के कई नेता पहले से जांच के दायरे में हैं और अब मुख्यमंत्री खुद जांच एजेंसियों पर दबाव बनाकर बचने की कोशिश कर रही हैं।

भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन कर कहा कि अगर जांच के दौरान किसी अधिकारी को धमकाया गया है या दस्तावेज छिपाने की कोशिश हुई है, तो कानून के तहत सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कानून सभी के लिए समान है और मुख्यमंत्री होने के बावजूद ममता बनर्जी जांच से ऊपर नहीं हो सकतीं।

इस बीच, कोलकाता और विधाननगर पुलिस ने औपचारिक रूप से प्राथमिक जांच शुरू कर दी है। तृणमूल कांग्रेस ने ईडी की छापेमारी को चुनौती देते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय में याचिका भी दायर की है, जिसमें तलाशी अभियान के दौरान जब्त किए गए दस्तावेजों के दुरुपयोग पर रोक लगाने की मांग की गई है। वहीं ईडी ने भी उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर जांच में हस्तक्षेप के आरोप लगाए हैं और कथित बाधाओं की जांच सीबीआई को सौंपने का अनुरोध किया है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह विवाद आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है। बंगाल की राजनीति में पहले से ही केंद्र और राज्य सरकार के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है, और इस घटनाक्रम ने उसे और धार दे दी है। अब सभी की नजरें अदालत के फैसले और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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