लखनऊ। देव पुरोहित महासभा के वरिष्ठ गुरुजनों द्वारा होली पर्व को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गई है। इस वर्ष तिथियों के विशेष संयोग के कारण होलिका दहन, चंद्रग्रहण और रंगोत्सव अलग-अलग दिनों में मनाए जाएंगे।
गुरुजनों के अनुसार, फाल्गुन मास की पूर्णिमा को प्रतिवर्ष होलिका दहन का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि 2 मार्च को सायं 5 बजकर 18 मिनट तक रहेगी। इसके पश्चात पूर्णिमा तिथि प्रारंभ होकर रात्रि तक रहेगी।
हालांकि 2 मार्च को सायं 5:18 बजे से लेकर रात्रि 4:56 बजे तक भद्रा का प्रभाव रहेगा। शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार भद्रा काल में होलिका दहन वर्जित माना जाता है, लेकिन भद्रा के “पुच्छ” भाग में होलिका दहन किया जा सकता है। इस वर्ष भद्रपुच्छ का समय रात्रि 12:50 बजे से 2:02 बजे तक निर्धारित किया गया है। इसलिए होलिका दहन 2 मार्च की रात्रि 12:50 से 2:02 बजे के मध्य किया जाएगा।
गुरुजनों ने यह भी बताया कि 3 मार्च को चंद्रग्रहण रहेगा। 3 मार्च को प्रातः 6:10 बजे से चंद्रग्रहण का सूतक काल प्रारंभ हो जाएगा, जो सायं 6:47 बजे तक प्रभावी रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक काल में शुभ कार्य वर्जित होते हैं। इसी कारण 3 मार्च को रंगोत्सव नहीं मनाया जाएगा।
इसके चलते रंगों का पर्व 4 मार्च को पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाएगा। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे निर्धारित तिथि एवं शुभ मुहूर्त के अनुसार ही धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करें।
धार्मिक परंपराओं और शास्त्रीय नियमों को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष होली का पर्व तीन दिनों में विशेष रूप से विभाजित रहेगा — 2 मार्च को होलिका दहन, 3 मार्च को चंद्रग्रहण और 4 मार्च को रंगोत्सव।