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झारखंड में नए नवेले सब-इंस्पेक्टर शैलेश कुमार ने 96 घंटे में ही करियर दांव पर लगाया, 30 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तारी

पोस्टिंग के तीसरे दिन ही रिश्वत लेते धरा गया दरोगा, एंटी करप्शन टीम ने रंगे हाथ किया गिरफ्तार

झारखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम के तहत एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। महज तीन दिन पहले नौकरी जॉइन करने वाले नव नियुक्त दरोगा को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया है। यह मामला न सिर्फ पुलिस महकमे के लिए शर्मनाक है, बल्कि सिस्टम में मौजूद उस सोच को भी उजागर करता है, जहां कुछ लोग वर्दी को सेवा नहीं बल्कि कमाई का जरिया समझ लेते हैं।

गिरफ्तार दरोगा की पहचान शैलेश कुमार के रूप में हुई है। शैलेश ने 19 जनवरी 2026 को सब-इंस्पेक्टर के पद पर योगदान दिया था और 22 जनवरी 2026 को ही एंटी करप्शन टीम ने उसे 30 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए धर दबोचा। यानी पोस्टिंग के महज 96 घंटे के भीतर ही उसका पूरा करियर सवालों के घेरे में आ गया।

जानकारी के मुताबिक, शैलेश कुमार पर एक मामले में पीड़ित को कार्रवाई से राहत दिलाने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप था। पीड़ित ने इसकी शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो से की, जिसके बाद टीम ने पूरे मामले की गोपनीय जांच की। शिकायत सही पाए जाने पर एसीबी ने जाल बिछाया और तय योजना के अनुसार जैसे ही दरोगा ने रिश्वत की रकम ली, टीम ने उसे मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया।

एंटी करप्शन ब्यूरो के अधिकारियों का कहना है कि आरोपी के पास से रिश्वत की पूरी रकम बरामद कर ली गई है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है। जल्द ही आरोपी को अदालत में पेश किया जाएगा, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की संभावना है।

यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है। आमतौर पर माना जाता है कि नई नियुक्ति पाने वाले अधिकारी शुरुआत में नियम-कानून और अनुशासन को लेकर ज्यादा सतर्क रहते हैं, लेकिन इस मामले में उलटा देखने को मिला। तीन दिन के भीतर ही रिश्वत लेने का साहस यह दर्शाता है कि भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं और कुछ लोग नौकरी जॉइन करते समय ही गलत मानसिकता के साथ सिस्टम में प्रवेश करते हैं।

पूर्व अधिकारियों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं ईमानदार पुलिसकर्मियों की छवि को भी नुकसान पहुंचाती हैं। वर्दी पहनते समय ली गई शपथ का इस तरह उल्लंघन करना न सिर्फ कानून के खिलाफ है, बल्कि जनता के भरोसे के साथ भी विश्वासघात है।

फिलहाल एंटी करप्शन ब्यूरो की इस कार्रवाई को एक कड़ा संदेश माना जा रहा है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। यह मामला उन अधिकारियों के लिए भी चेतावनी है, जो वर्दी की ताकत का गलत इस्तेमाल करने का सपना देखते हैं। कानून के शिकंजे से बचना अब आसान नहीं है और एक छोटी सी गलती पूरी जिंदगी पर भारी पड़ सकती है।

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